
माये नी मेरीये,
बाबे दी गलियाँ,
खाटू कितनी दूर,
जयपुर नि वसना,
रिंगस नि वसना,
खाटू तो जाणा जरुर,
खाटु कितनी क दूर।।
तर्ज – चम्बा कितनी दूर।
खाटू दी गलियाँ,
सपणे च ओंदी,
अखियां च छाया सुरूर,
ओदी ही करनी,
हाँ मैं जी हजूरी,
मालिक ओ मेरा हुजूर,
मैं ता बाबे दे,
मंदर नू जासा,
ओ मेरी अखियाँ दा नूर,
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