
खाटू तू आकर देख यहाँ सच्ची अदालत है
खाटू तू आकर देख,
यहाँ सच्ची अदालत है,
श्याम अपने भक्तो की,
खुद करता वकालत है।
तर्ज – बाबुल का ये।
पापी का दिल धड़के,
जब नज़रें मिलती है,
पापी भी तर जाए,
जो माने गलती है,
होता सपर्पण तो,
बा इज्जत जमानत है,
जग की अदालत में,
अँधा कानून चले,
रिश्वत के दम पे वहां,
हाँ होते कई फैसले,
न्याय खरा इनका,
नहीं कोई मिलावट है,
अर्जी की पेशी यहाँ,
दुखियारे करते है,
बिगड़े मुक़दमे भी,
इस दर पे संवरते है,
बिट्टू शरण आजा,
बाबा करता हिफाजत है,
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