
खाटू नगर जाना है हमें,
श्याम के दर जाना है हमें,
चलो उनके लिए कुछ लेते चले,
और प्रेम भाव से कहते चले,
थोड़ा दही मखन लेते चले,
तर्ज – आज उनसे मिलना है।
त्रिलोक राजा है सांवला सयाना है,
वोह इक ग्वाला है जाने दिल,
क्या क्या खरीदे हम,
क्या ना खरीदे हम,
क्या दे निशानी है ये मुश्किल,
कुछ खट्टा मीठा लेते चले,
थोड़ा मखन दही लेते चले,
सब उनकी पसंद का लेते चले,
कुछ पकवान लेते चले,
पूजा करेंगे तो हम क्या मांगेगे,
ये सोचा ना समझा ना जाना है,
शायद कहीं ऐसा उनका हमेशा से,
सर आंखो पर ही ठिकाना है,
थोडा काजू किशमिश लेते चले,
सब थोडा थोडा लेते चले,
गायक / प्रेषक – वैभव जोशी।
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