
खुद से चल जाती नईया जो हमारी,
तो फिर ना होती दरकार तुम्हारी,
मेरे मजी बन जाओ मेरी नाव चला जाओ,
सुख में भुलाया तो दुःख ने सताया,
मुसीबत में कोई भी काम ना आया,
मेरी बिगड़ी बना जाओ मेरी लाज बचा जाओ,
खुद से ये नैया चला के मैं हारा,
आखिर में तुमको मैंने पुकारा,
आओ जल्दी आओ पतवार पकड़ जाओ,
कोई अच्छा जो माझी जो नइयाँ चलाता,
तुझको भुलाने का मौका न आता,
ये अटक गई नइयाँ आकर के चला जाओ,
मेरा बस तो तुम पे ही चलता कन्हैया,
तेरे ही चलाये से चलती है नइयाँ,
भव पार लगा जाओ अर्जी न ठुकराओ,
कभी सोचता हु हमारा क्या होता,
अगर कान्हा तेरा सहारा न होता,
कहे पवन को समजाओ इतना तो बतलाओ,
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