
गणनायक राजा,
दोहा – प्रथम सिमरू शारदा,
गुरुचरण सिर नाय,
गजानंद आनंद सहित,
हृदय बिराजो आए।
राखो सभा में म्हारो मान।।
तर्ज – गर जोर मेरो चाले।
प्रथम याचना कीनी थांसू,
शरणो लीनो आन,
रणतभंवर गढ़ आप बिराजो,
दुनिया धरे थारो ध्यान जी,
गण नायक राजा,
पढ़ा-लिखा मैं ऐसा नाही,
ना कोई दूजा ज्ञान,
कर में कलम रुक गई मेरे,
आप करो कल्याण जी,
शिव योगी के पुत्र लाडले,
जिनके अद्भुत भाल,
मूसे ऊपर करो सवारी,
पार्वती के लाल जी,
रिसड़ा मंडल अरदास करत है,
चरणों में उबा आए,
हृदय माय करो उजियारो,
हरदम उपजे ज्ञान,
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