
भक्ति रस का तू रस पान कर ले
चार दिन की जिन्दगी है ध्यान धर ले
ध्यान धर ले रे तू ध्यान धर ले
चार दिन की जिन्दगी है...
देवों में देव हैं गणपति जी प्रथम देवा
इनकी सेवा से पाएगा तू मेवा
प्रथम पूजन इनका ए इंसान कर ले
विघ्नहर्ता हैं तेरे सारे विघ्न हरेंगे
मनोकामनाएं सारी तेरी पूरी करेंगें
इनके चरणों में सारा तू जहान कर ले
इनकी भक्ति कभी विफल ना जाए
राह भले दुर्गम हो सरल बनाए
बात सुन राजीव की तू कान धर ले
©राजीव त्यागी
नजफगढ़ नई दिल्ली
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