
गम खाना चीज बड़ी है,
अरे गम खाना चीज बडी़ है ए हा,
अरे कोई देखो गम खाय के,
कोई देखो रे गम खाय के,
गम खाना चीज बडी़ है ए हा।।
अरे गम खाई प्रहलाद प्यारे,
अरे असुर जतन कर कर्मो सारे,
अरे खम्बा फाड हिरण्यकुश मारे,
अरे खम्बा फाड हिरण्यकुश मारे ए हा,
अरे नरसिंह रूप दिखाय के,
झटपट से विपत्त हरी है,
झटपट से विपत्त हरी रे,
गम खाके ध्रुव निकले वन में,
अरे गम खाके ध्रुव निकले वन में,
अरे करी तपस्या बालपन मे,
अरे सूरत धरी वा हरी के चरण में,
अरे सूरत धरी वा हरी के चरण में ए हा,
अरे चिंता मेटि आय के,
दरवाजे ध्वजा खडी है,
गम खाकर सुग्रीव सीधाये,
अरे गम खाकर सुग्रीव सीधाये,
अरे विष्णु पर्वत ओ बिराजे,
अरे एक बाण से बली खपाये,
अरे एक बाण से बली खपाये ए हा,
अरे रघुवर निगेह रचाय के,
रघुवर निगेह रचाय के,
गले फूल माला पडी है,
विभिषन ऐसी गम खाई,
अरे नाथ सही रावण की भाई,
अरे जिसको राज दियो रघुराई,
अरे जिसको राज दियो रघुराई ए हा,
अरे सगला असुर मारके,
अरे सगला असुर खपाय के,
दुश्मन की लगी जडी है,
अरे बडी़ चीज गम खाना प्यारा,
अरे गम खाने से होत गुजारा,
अरे सुखीराम निज गुरु का प्यारा,
अरे सुखीराम निज गुरु का प्यारा ए हा,
अरे निर्गुण भजन बनाय के,
निर्गुण भजन बनाय के,
अरे समझे अमर जडी है,
जो समझे अमर जडी है,
गायक – शंकर जी टाक।
प्रेषक – मनीष सीरवी
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.

