
गया जबसे मथुरा तो वापस न आया
प्रीत करके जो तूने है,
दिल को चुराया,
गया जबसे मथुरा तो,
वापस न आया।।
तर्ज – मोहम्मद रफी तू।
अदा मुस्कुराहट,
चलन ओर चितवन,
वो घुंघराले बालों की,
प्यारी लटकन,
तेरा रूप कोई,
नही भूल पाया,
मेरे और मोहन के,
दरम्यान होकर,
बसा है अजब इश्क,
मेहमान बनकर,
मेरे दिल को दूजा,
कोई भी न भाया,
तेरी याद हरपल,
मुझे यूँ सताये,
करूँ बंद आँखें तो,
निंदिया न आये,
तू रग रग में ‘राजू’ की,
ऐसा समाया,
गया जब से मथुरा तों,
गायक – राजू बिदुआ।
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