
( मायें नी मायें, मैं एत्थे दुनिया दा ठुकराया।
दर दर तो....मैनु मिले ने धक्के,
मैं ता तेरे घर आया।। )
तेरे रहमता दे खुले ने, रहमता दे खुले,
तेरे रहमता दे खुले ने, भंडारे शेरवालिये,
सानु भी गरीबां नु माँ तार,
शेरवालिये......
सोहने सोहने भवना ते लाल झंडिया,
हर वेले जांदिया मुरादा जिथे वंडियां।।
वेखना एह ओहिओ...... दरबार शेरवालिये,
ज्योतावलिये......
जगमग ज्योत तेरी हल ए सवालां दी,
विच मझधार फसी बेड़ी तेरे लाला दी।।
डिक डोले खांदी आ....लादे पार शेरावालिये,
मिहरावलिये......
हो दिल्ली भी है इक तेरा बचड़ा संदीप माँ,
देके दीदार खोल ओहदे भी नसीब माँ।।
पूछ सरदूल दी भी..... सार शेरावालिये,
पहाड़ावालिये ......
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