
गिरने लगा है, आंख से पानी,
सुन के सिया की-राम सिया की-2 विरह कहानी
तर्ज: शुरू ही रही है प्रेम कहानी
दुख का कैसा फूल खिला है, राम को जब बनवास मिला है-2
राम लखन के साथ मे चल दी,-2 होने वाली अवध की रानी ।
वन में कितने कष्ट उठाये, एक दूजे का साथ निभाये-2
सोने के हिरण के कारण-2 बिछड़ गये फिर दोनों प्राणी ।
लंका जीत अयोध्या आये- राजतिलक की खुशियां पाये-2
धोबी के ताने के कारण-2, राजा राम ने त्यागी रानी ।
सुख-दुख तो सबको सहना है-मर्यादा में भी रहना है-2
जीवन को कैसे जीना है-2 सिखलाती है राम कहानी ।
लेखक: विष्णु कुमार सोनी, कानपुर
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