
गिरवर सू गंगा उतरी रे,
बातों तो आई आई भागीरथ रे द्वारा,
मारा भागीरथ रे,
गंगा मैया छोड़ी ऐ जाय।।
जन्म दियो मारी मावड़ी जी,
ओ तो रूप दियो जी किरदार,
मावड़ली रो बदलो नहीं उतरे जी,
कोई मावड़ली बताओ जुग संसार,
भाई एक सीयाले री माजल रात,
सुख भर लडलने सुलावियो जी,
कोई भिगोड़ में सुती मारी माय,
सुरंगा में गेरा बाजा बाजियां जी,
ऐ तो बाजा बाजा सोहन थाल,
गंगा बड़ी जमुना बड़ी जी कोई,
तीर्थ बड़ो हरिद्वार,
कोई इण गंगा माई रे मारगा जी,
कोई जीणी जीणी उड़ें रे गुलाल,
कोई इण रे गंगा माई रे मारगा जी,
कोई झीर मीर मेह बरसाय,
साधुड़ा री भीगी भगवी चादरा जी,
कोई लाडकड़ी रो भींगे सिंगार,
इण रे गंगा माई रे मारगा जी,
ओतो बैदयो तों भण रे कबीर,
कोई सोनयो तो गड़ रहे सुनार,
जीको नर गुगल धुप खेवसी जी,
कोई सुरग नेड़ो ने घर दुर,
जिको नर भागीरथ गावसी जी,
वो तो वास बैकुंठ रो पाय,
गायक – पूनम चंद लटियाल।
प्रेषक – सुभाष सारस्वा काकडा नोखा।
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