
गुरासा म्हाने ग्यान बतायो रे ए जग झूठ लखायो रे
गुरासा म्हाने ग्यान बतायो रे,
ए जग झूठ लखायो रे,
गुरासा माने ग्यान बतायो रे,
जग झूठ लखायो रे,
आत्मा मे नेचो खायो ए हा।।
ए गुरू रेण अंधीयारी रे,
ज्यु सर्प निहारी रे,
गुरू रेण अंधीयारी रे,
भय लागो भारी रे,
रे ज्यु सर्प निहारी रे,
जग झूठ लखायो ए,
ए मीरकाजल दिसे रे,
कोई पिया न पिसे रे,
ए काजल दिसे रे,
ए कोई पिया न पीसे रे,
ज्यु विशवा विसे रे,
ए सीप अनुपा रे,
कोई भया न भूपा रे,
गुरू सीप अनुपा रे,
कर जानीया रूपा रे,
ए बचीया सुख झूले रे,
आकाश फूले रे,
बचीया सुख झूले रे,
सुन्दर कदेनी भूले रे,
कदेनी भूले रे,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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