
गुरु मोहे उबारो,
भवसागर अति भारो,
काम क्रोध मद लोभ मोह का,
हो रियो जय जयकारो।।
आशा तृष्णा नदियां बह रही,
कहीं ना देखे किनारो,
सत्य न्याय की बात ना माने,
देख लियो सब धारों,
भवसागर से आप दयालु,
करते तुरंत उबारो,
अब मैं नाथ शरण में तेरी,
और नहीं सहारो,
शरणागत की लज्जा राखो,
सांचौ वृहद तुम्हारो,
भक्तजनों पर भीड़ पड़ी जब,
आप लिया अवतारो,
जय शिवानंद जी यू समझावे,
गुरु बिन कोई भव मेटर हारो,
निस दिन ध्यान धरो सतगुरु का,
और न कोई हमारो,
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