
गूँगों को बोलते नज़ारा देखा
गूँगों को बोलते, जयकारा देखा,
मइया, तेरी जोत का नज़ारा देखा ॥
ओ बड़ी, सोहणी लगदी ।
ओ बड़ी, प्यारी लगदी ।
मइया दी, जोत जगदी ।
नंगे नंगे, पैरीं मइया, अकबर आया ।
सोने का, मइया ओहने, छत्तर चढ़ाया ॥
सोने तो, तांबा बन जाता देखा,
अकबर राजा, मइया, ज़ुल्म कमाया ।
जोतां ते, तेरी मइया, लहरां लियाया ॥
ओ पानी ऊपर, जगदी ज्वाला देखा,
ध्यानू भगत मइया, ज़ुल्म कमाया ।
घोड़े दा, मइया, शीश कटवाया ॥
धड़ नाल शीश, जुड़ जाता देखा,
अपलोडर – अनिलरामूर्ति भोपाल
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