
गोविंद थे छो दया निधान झोली भर दो जी भगवान
गोविंद थे छो दया निधान,
झोली भर दो जी भगवान,
राखो घर आया को मान,
मैं सुनाऊं विनती।।
आप बिराजो निज मंदिर में,
सामे कंचन मेहल,
राधा जी ने लेर बाग में,
रोज करो थे सेर,
मंडफिया नगरी आलीशान,
जीमे बैठा जी भगवान,
बचपन बीत जवानी बीती,
फिर भी गणा दुख जेलया,
आप जैसा के पाले पड़कर,
फिर भी पापड़ बेलया,
मैं तो टाबर छू नादान,
अर्जी सुण ज्यो जी भगवान,
बड़ा लोग या साची केथा,
दीपक तले अंधेरा,
घर का पूत कुंवारा डोले,
पड़ोस्या के फेरा,
गोपाल थे छो अकलवान,
मैं गरजी अर्जी कर हारयो,
आप मूंद लिया कान,
मरता दम तक कहतो रहस्यों,
बण्या रहो यजमान,
गोपाल थे हो अकलवान,
मैं तो बालक हूँ नादान,
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.




