
घणी घणी खम्मा म्हारी आवरा री मात ने
सिंह री सवारी मैया,
आवरा पधारो,
ज्यारे दुनिया तो,
दर्शन आयी जियो,
घणी घणी खम्मा,
म्हारी आवरा री मात ने,
बाईसा ने सारो जग ध्यावे जियो,
घर घर ज्योति सवाई जियो,
शक्ति रो रूप बन माताजी पूजावे,
मूर्ति रूप के माई जियो,
गाँव आसावरा है जग थानो,
परचा तुरंत दिखाया जियो,
लुला तो लंगडा आवे आंधा ने बेरा,
लुला तो लंगडा मैया आंधा ने बेरा,
गूंगा थारा गुण गावे जियो,
सन्मुख थारे माँ सागरीयो लहरावे,
स्नान करे जो सुख पावे जियो,
एक तरफ मैया शिव शंकर बैठा,
हनुमंत हाक लगावे जियो,
बारीया माई निकले ज्यारा रोग मिट जावे,
ताती बांधे सुख पावे जियो,
दोनो नवरात्रि मे मेलो रे भरावे,
लाखो लाखो जातरी तो आवे जियो,
सुदी आठ्म को मैया जागन जगावे,
सुदी आठ्म रो जागन जगावे,
भजन मंडली आवे जियो,
पुरीगा मेथी वंश पुजाई,
आरती पूजा तो मन भावे जियो,
ऊंच नीच को काम नही है,
जात छत्तीस थारे आवे जियो,
सूखा ने हरीया करे माता म्हारी पल में,
सूखा ने हरीया करे माता म्हारी,
जय जयकार लगावे जियो,
फूल माल साथ नारियल,
चुनडी चढावा थारे लावे जियो,
अगवानी मे भेरू भदेश्वर,
घुंगरीया घमकावे जियो,
घणा यात्री मैया पैदल पैदल आवे,
घणा यात्री पैदल पैदल आवे,
घणा तो लोटन कर आवे जियो,
गायक – महेंद्र सिंह जी राठौर।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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