
घायल कर गया ओ गुरूजी म्हानें,
दोहा – सतगुरु मेरी आत्मा,
मै संतो री देह,
रोम रोम में रमरया,
गुरू ज्यु बादल बीच मेह।
घायल कर गया ओ गुरूजी,
म्हाने घायल कर गया ओ,
उलझीया ने सुलझाय प्रेम गुरू,
चेतन कर गया ओ,
चेतन मिल गया ओ।।
सतगुरु आंगन रूकडी ने,
हर कोई लेवन जाय,
आंगन ऊपर कुण करे रे,
ज्यारो सर्व रोग कट जाय,
गुरूजी म्हाने घायल कर गया ओ,
भाव रूप तो फली घणा ने,
फल लागे सोपेर,
भरी सभा में बाट जोवे,
ज्यारो भाग सवायो होय,
अरे मन रा मोरला ने फेरले ने,
तन बीच तार लगाय,
मन रा मोरला ने फेरले ने,
अभिमान ने दूर करले,
अभिमान दूर करले,
सर्व रोग कट जाय,
लागी लगन मगन होय बैठा,
उन मुुन ध्यान लगाय,
देवादास अमृत रा प्याला,
प्रेम दास ने जाय,
घायल कर गया ओ,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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