
घुड़लो मोड़ दो सावरियाँ,
थारो भगता री ओर,
थारा टाबरिया बुलावे बाबा,
आवो म्हारी ओर।।
खेचलो नकेल थारे,
घोड़ले री सावराँ,
कोई ढीला छोड्या थाने,
लेजासी कथे ओर,
म्हे कद स्यू अरजी किन्ही,
थे नही सुन्या सावराँ,
कोई अरजी पढ़के बाबा,
करल्यो थोरो गोर,
बैठ दूरी पर बाबा,
म्हे थारी बाट उड़िका हा,
म्हारे घरा कैया आवण,
बाबा लागे थाने जोर,
सभी केवे यो प्रेमरो नातो,
बाबा थे मत तोरो ना,
कोई प्रीत रे बंधनरी,
बाबा कसके पकड़ो डोर,
भजन प्रेषक एवं गायक
रोहित कुमार शर्मा
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