
घुमा दे फागण बालमा
आयो फागण रंग रंगीलो,
भरयो खाटू धाम मैं मेलो,
आवे लाखों ही नर नारी,
रंग हाथ में ले पिचकारी,
खेलो श्याम धणी को आयो बालमा
मेलो फागण को इबके घुमादे बालमा,
मन्ने श्याम धणी से मिलादे बालमा....
तेरी मती गयी सै मारी,
तन्ने चढ़ री घणी खुमारी
इसकी सेठां के संग यारी,
क्यूँ ना बात समझ तेरे आरी
छोटी चादर मैं पैर पसारूँ कियाँ बावली
कैसे फागण का मेला मैं घुमादु बावली
तन्ने श्याम से कैसे मैं मिलादूँ बावली....
होली खेलैं श्याम दीवाने,
संग बाबा के मस्ताने
बज रे ढोलक चंग नगाड़े,
लग रे सुन्दर बड़े नज़ारे
झूमे धरती अम्बर संसार बालमा
जी मेरा भी सै कर रया,
खाटू गये हो गया अरसा
छू री आसमान महंगायी,
इबकी तनख़्वाह भी ना आयी
केसे खर्चा चलेगा इस बार बावली
छोड़ चिंता कल की सारी,
खुद देखेगो श्याम बिहारी
मेरे श्याम की लखदातारी,
या जानै सै दुनिया सारी
तू भी चरणों की धोक लगाले बालमा
तू सै जीती और मैं हारा,
ले लिया श्याम नाम का सहारा
तेरी बात मानली सारी,
री पूनम करले इब तैयारी
माना मेला फागण का सबसे नयारा बावली
तन्ने फागण का मेला मैं घुमादूँ बावली
इबके श्याम से तन्ने मैं मिलादूँ बावली...
इबके सगला ही खाटू आपाँ चालां बावली
इबके सगला ही खाटू आपाँ चालां बालमा......
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