
चरनो में गुरुवर के प्रणाम करता हू गुरुदेव भजन विजय कौशलजी महाराज
चरनो में गुरुवार तेरे प्रणाम करता हू
स्वीकार कीजिए दास की वंदना
चरनो में गुरुवार के प्रणाम करता हू
स्वीकार कीजिए दस की वंदना
गुरुजी आप दयालु है दयावान है
करते रहते सदा हमपे अहसान है
भूल क्षमा कर देते है
और अपनी शरण में लेते है
हम तो भटक रहे थे अंधकार में
कोई मंज़िल नही थी संसार में
धर्मा का दीपक जला दिया
हमे भजन का मार्ग बता दिया
अब तो मन में हमारे यही है लगन
करदे कृपा तो हो जाए हरी से मिलन
हमको भक्ति का वार देना
थोड़ी आप शिफरिश कर देना
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