
चली जा रही है उमर धीरे धीरे लिरिक्स
चली जा रही है उमर धीरे धीरे
पल पल हो आठो पहर धीरे धीरे
जो करते रहोगे भैया भजन धीरे धीरे
जो करते रहोगे बाबा भजन धीरे धीरे
तो मिल जायेगा सजन धीरे धीरे
बचपन भी जाये जवानी भी जाये
बचपन भी जाये भैया जवानी भी जाये
बुढ़ापे का होगा असर धीरे धीरे
तेरे हाथ पाव में बल ना रहेगा
झुकेगी कमर तुम्हारी धीरे धीरे
बुराई से मन को बन्दे अपने हटाले
बुराई से मन को प्यारे अपने हटाले
बन जायेगा प्यारे जीवन धीरे धीरे
जो करते रहोगे भक्तो भजन धीरे धीरे
गुरुदेव
के भजन यहा पर देख सकते है
मोहे लागी लगन गुरु चरणन की भजन
हरयाणवी गाना माटी में मिले माटी पानी में पानी अरे अभिमानी
पाप की नगरिया में पुण्य कब कमाओगे
जनम अनमोल रे जहर मत घोल रे
गुरूदेव की कुटिया को मैंने फूलो से सजाया है
हे गुरुदेव मेरे दिल में आओ भजन
खाली हाथ आया है खाली हाथ जायेगा
हरी नाम नही होता तो भक्तो का क्या होता
जगत में कोई ना परमानेंट भजन
अपना मुझे बनाके चरणों से मुझे लगाके भजन
आदमी मुसाफिर है आता है जाता है भजन
क्या लेके आया बंदे क्या लेके जायेगा दो दिन की जिंदगी है
मनुष जनम अनमोल रे मिट्टी में ना रोल रे भजन
गुरुदेव मेरी नैया उस पार लगा देना
कसमे वादे प्यार वफ़ा सब बातें हैं
चली जा रही है उमर धीरे धीरे भजन के गायक श्री देवेन्द्रजी पाठक
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