
चलो भगतो मेरे संग चलो दरबार चलो
दरबार चलो दरबार चलो दरबार चलो इक बार चलो
करने माँ के दीदार चलो
दरबार चलो दरबार चलो दरबार चलो
याहा सब के मुकदर सवर जाते खुशियों से खजाने है भर जाते ,
जो मैया के कर लेता दर्शन नाम दुनिया वो अपना कर जाते
उचे पर्वत के पार चलो इक बार चलो इक बार चलो करने माँ के दीदार चलो
जिस चोकठ की बात निराली है यहाँ भगतो की रोज दीवाली है
याहा चरणों में सजदे करने को आते कितने ही सवाली है,
श्रधा के लेके हार चलो इक बार चलो इक बार चलो करने माँ के दीदार चलो
यहाँ कण कण में मैया वस्ती है ममता ही ममता बरस ती है
दर पे आने वालो के माँ तकदीर के लेखे रचती है,
करते माँ की जैकार चलो एक बार चलो एक बार चलो करने माँ के दीदार चलो
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