
चामुण्डा धुम्बडा पहाडा ती रे,
ए परा हालीया परा आया,
मुण्डारा माय,
ए चामुण्डा सिंह सवारी रे,
अरे हाले माताजी,
काला गोरा भेरू साथ,
ए जगदम्बा सिंह सवारी ओ जी।।
अरे चामुण्डा सिंह सवारी रे,
सवार वेगीया काला गोरा भेरू साथ,
जगदम्बा आया मुण्डारे,
डेरो गालीयो जद सुनो,
जगे वनवासो माय,
माताजी आयो मुण्डारे रे ओ जी।।
ए चामुण्डा केसोजी देवासी रे,
अरे दर्शन देवीया,
सेवा करे माँ आठो पोर,
अरे केसोजी देवासी रे,
अरे दर्शन किना पूजा करे,
माँ आठो पोर,
माताजी धूप दिपने,
अरे थोरी करे सेवा,
रेवे वेला आठो पोर,
माताजी धूप दिपने ओ जी।।
ओ माताजी बीज तेरस रो रे,
थोरो मेलो लागे मुण्डारा माय,
ए माताजी बीज तेरस रो रे,
ए माजी दूर दूरा रा रे,
ए आवे जातरू आवे मुण्डारा माय,
जगदम्बा दूर दूरा रे ओ जी।।
ओ चामुण्डा देवासी कुलतो रे,
अरे थोने मनावे,
अरे थोने ध्यावे जुग संसार,
ए भवानी ओटोजी भोपोजी रे,
आका देवे आका देवे मुण्डारा माय,
मैया दुखीया रा तो रे दुखड़ा,
कोडो हमेशा मा ओ जी।।
ए चामुण्डा गाँव गाँव मे,
ए थोरा मंदिर बनीया,
ध्वजा फरूके असमानो माय,
ध्वजा फरूके असमानो,
ए रूपेश प्रजापत रे,
अरे करे सेवना,
दर्शन आवे मुण्डारा माय,
चरने दास कन्हैयो रे,
अरे चरने आयो देवाराम परमार,
साथ भगतो ने तो रे,
माताजी होरा राखो,
होरा राखो बाहरो मास ओ जी।।
गायक – संत कन्हैयालाल जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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