
चाल भाईडा चाल जे रे,
सोनाला के मेले चालो रे,
सोनाला के मेले जावा रे,
भेरू ने तो जाय मनावा रे,
ए सोनाला रा मेले जावा रे,
खेतलाजी ने जाय मनावा रे,
अरे चाल साथीडा चाल जे रे,
सोनाला मेले जावा रे।।
ए चाल साथीडा चाल जे रे,
फुलडा रा हार चढावा रे,
ए फुलडा रा हार चढावा रे,
खेतलाजी ने जाय पेरावा रे।।
अरे चाल भाईडा चाल जे रे,
पैदल संग मे आपा जावा रे,
ए पैदल संग मे जावा रे,
भजना मे घणा घणा नाचा रे,
ए खेतलाजी रो मेलो आयो,
ए सोनाला वीर रो मेलो आयो,
ए जानो सोनाला रे माय,
खेतलाजी रो मेलो,
ए मुकेश भोपोजी पैदल संग मे आवे,
अरे आवे सोनाला रे माय भेरूजी रो मेलो,
अरे आवे खेतलाजी रे द्वार भेरूजी रो मेलो।।
आयो भेरू रो दरबार,
ए सोनाला मेले जावु रे,
ए भेरू रो बडो दरबार रे,
खेतलाजी रो बडो दरबार।।
ए भेरू रो दरबार मारे,
खेतलाजी रो दरबार,
भेरू रो दरबार मारे,
मारे भेरूजी रो दरबार।।
ए चाल भाईडा आपा,
सोनाला मे चालो रे,
चाला सोनाला मे चालो रे,
ए सोनाला मे जावा आपा,
गुण भेरू रो गावा रे।।
गायक – संत कन्हैयालाल जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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