
चौसठ जोगनीया ए अरजी,
सुनजो म्हारी माँ,
विनती सुनजो म्हारी माँ.
लजीया राखजो ए अरजी,
तर्ज – देवलिये रम जाए।
ए महामाया जोग समाया,
अद्भुत रूप बनाया,
अद्भुत रूप बनाया जोगनीया,
दानव दल संगारे माता,
जग में नाम पुजाया,
पर्वत नीचे राजे भवानी,
बड़ निम्बड की छाया,
बड़ निम्बड की छाया जोगनीया,
अचनावु देवलीया माई,
केई रूप बनाया,
सतीया सामे दृष्टि आपकी,
घणा यात्री आवे,
घणा यात्री आवे जोगनीया,
दुख दारी दर दूर करे माँ,
दुख दारी दर दूर करे,
कंचन करदे काया,
आधी शक्ति आगे नाचे,
चौसठ जोगनीया,
चौसठ जोगनीया नाचे,
डमरू बजावत भेरू नाचे,
सकल जगत महामाया,
नानु पंडित मांगे चरना,
बार बार यश गावे,
बार बार यश गावे जोगनीया,
माताजी री महिमा देखो,
हाजिर परचा पाया,
गायक – मोईनुद्दीन जी मनचला।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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