
छायें काली घटाये तो क्या,
तेरे आँचल के नीचे हूँ मैं,
आगे आगे वो चलती मेरे,
अपनी श्यामा के पीछे हूँ मैं ,
उसने पकड़ा मेरा हाथ है,
फिर डरने की क्या बात है।।
श्यामा प्यारी मेरे साथ है,
मेरी श्यामा की क्या बात है,
इसके होते कोई कुछ कहे,
बोलो किसकी ये औकात है।।
उनकी करुणा का वर्णन करूँ,
मेरी वाणी में वो दम नहीं,
जबसे इनका सहारा मिला,
फिर सताए कोई गम नहीं,
करती ममता की बरसात है,
मेरी लाड़ो की क्या बात है,
राधा रानी मेरे साथ है,
इनके रहते कोई कुछ कहे,
क्यों तू भटके यहाँ से वहां,
इनके चरणों में आ बैठ ना,
छोड़ के नाते सभी,
श्यामा प्यारी से नाता बना,
ये कराती मुलाक़ात है,
बोलो किसकी ये ओकात है।।
गर हो जाये करुणा नज़र,
बरसाना बुलाती हैं ये,
‘बिन्नू’ क्यों ना दीवाना बने,
ह्रदय से लगाती है ये,
प्यार करने में विख्यात है,
1. “छायें काली घटायें तो क्या” भजन किसने लिखा है?
यह एक पारंपरिक भजन है, जिसे कई भजन गायकों ने गाया है, लेकिन मूल लेखक की जानकारी स्पष्ट नहीं है।
2. यह भजन किस देवता को समर्पित है?
यह भजन भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में गाया जाता है।
4. क्या यह भजन गाने के लिए
3 या वीडियो भी उपलब्ध है?
हाँ, यूट्यूब पर इस भजन के कई संस्करण उपलब्ध हैं, जिन्हें आप सुन सकते हैं।
5. क्या यह भजन मंदिर या सत्संग में गाया जाता है?
जी हां, यह भजन आमतौर पर सत्संग, कीर्तन और मंदिरों में गाया जाता है।
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