
जगजननी के जस ला,मै गावाव,अउ सुनावव,
मातेश्री महामाया के,
गावाव जस बगरावव घेरी बेरी सोरियावव,
दाई दुरगा के कतको कहानी,सास्थार म अर्थाये,
कलम चलईया पोथी गड़थिस,लिखथिस वेद बताये,
अइसने एक ढन दाई कथा हर,मन भीतरी थिरियाये,
नवरात्रि के महिमा ल संगी,देथे सुरता देवाये,
सुने म बड़ निक लगथे,
अंतस ला जुड़वाव नवरात्रि ला मनावव,
जगजननी के जस ल......
सतवंतिन के सेवा करईया,बामन बपरा रहाये,
जेकर बेटी अपन ददा संग,पूजा बरत निभाये,
संझा बिहनिया चेत लगाके,मईया ला सोरियाये,
एक बेर ओखर बेटी सुमती,पूजा करे नई पाये,
बामन बपरा बड़ खिसियाये,
कइसे तोला थिरियवव।मरम तोला बतावव,
घर बिन जंगल जंगल भटके,कांदी के दशना दसाये,
अइसे करम ल देखके मईया, ठाढहे आगु म आये,
बोलिस बानी मया बटोरे,अनपुरना जग छाये,
सुमति मन अचरज पर जाथे,दाई ल तीर म पाये,
का सेती मोर दुःख ला हरबे,
चिन्हाला चिंहवव।बात फोर फ़हिरावव
सुमति गोढ़ ला सुनके मयारू,मरम ल फेर जनवाये,
पऊर जनम म भीलनी बनके,नव दिन भूखे रहाये,
तोर गोसइया के चोरी के सेती,दुनो कोठरी म जाये,
नव दिन ले बिन अनपानी के,जिनगी अपन चलाये,
नव राति के सेवा बजाये,
भाग अपन संहरावव दाई दुवारी म आवव,
नव दिन पूजा पाठ करे ले पुरखा घलो तर जाथे,
कोड़ही काया निरमल होंगे नवा जनम ल जनाथे,
छाहित होगे महतारी हा,अनधन सुत गठियाथे,
बिपदा परे म लाज बचइया,दाई ल कोन भुलाथे,
गौतम हा तोर आशीष पाये,
चण्डी मंडली म आवव सुरताल ल मिलावव,
॥जय माँ चण्डी सेवा एवं भजन मंडली॥
गांधी नगर लाखे नगर रायपुर (छ:ग)
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