
धुन- भगत के वश में है भगवान
जगत के सर पर जिनका हाथ, वहीं है अपने भोले नाथ
जिन चरणों में, सदा झुकाती
, सारी दुनियाँ माथ,,,
जगत के सर पर, जिनका हाथ,,,,,,,,,,,,,,
सृष्टि के पालक तुम ही, कुशल संचालक तुम ही,
'तुम्ही हो जग विस्तारक, तुम्ही इसके संघारक
जिनको पाकर कभी न समझे
, खुद को कोई अनाथ,
हिमालय पर तुम रहते, मार मौसम की सहते,
'गले में सर्प लपेटे, मगन मन रहते लेते
भूत प्रेत बेताल हमेशा
, रहते जिनके साथ,
कृपा सब पर बरसते सभी का मन हरसाते
'भगत जन जब भी तेरे, तेरे सदा जो दौड़े आते
अनुज देवेंद्र भी पाकर जिनको
, अब हो गए सनाथ,
जगत के कण कण में भगवान
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