
जपा कर बैठ कर बन्दे,
राम का नाम प्यारा है,
प्रभु का नाम प्यारा है,
छुआई चरण रज अपनी,
अहिल्या भव से तारी थी,
पति के श्राप से भक्तो,
बनी पत्थर बेचारी थी,
चरण रज उसको दी अपनी,
हाँ कष्टों से उबारा है,
पिता के वचनो को माना,
प्रभु जी गंगा आए थे,
प्रभु के पग पखारे थे,
चरणामृत केवट पाए थे,
बिठाया नाव में अपनी,
हाँ गंगा पार उतारा है,
भगत शबरी की कुटिया में,
प्रभु भाई सहित आए,
बेर झूठे माँ शबरी के,
हाथ से प्रभु जी थे खाए,
माँ शबरी का किया कल्याण,
प्रभु जी बने सहारा है,
राम के नाम का चन्दन,
श्री हनुमत ने लगाया है,
प्रभु जी ह्रदय लगाए थे,
भरत के सम बताया है,
चिर के सीना दिखलाया,
सभी ने दर्श पाया है,
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