
जब जब मुझको पड़ी जरुरत आया बनके सहारा
जब जब मुझको पड़ी जरुरत,
आया बनके सहारा,
मेरा खाटू वाला, श्याम,
मेरा खाटू वाला,
कभी ना मुझको हारने देता,
रहता बनके सहारा,
तर्ज – धरती सुनहरी अम्बर नीला।
जब कोई साथ नहीं था,
मेरा श्याम ही बना सहारा,
इसने ही हाथ को पकड़ा,
जब सबने किया किनारा,
कोई नहीं है श्याम के जैसा,
जो इतना प्यार लुटाता,
गर ना तेरा मिलता सहारा,
मैं फिरता मारा मारा,
जबसे तेरी चौखट पकड़ी,
मेरा कभी ना रुका गुजारा,
जो गया है सच्चे भाव उसपे,
खूब कृपा बरसाता,
शीश का दानी बाबा,
ये हारे का है सहारा,
खाटू में बैठा बाबा,
देखो सबके काम बनाता,
कहे ये बेटा ‘ओम’ आपका,
एक ही मेरा सहारा,
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