
जबसे मिली शरण,
की मेरे दिन बदल गए,
ऐसी लगी लगन,
तर्ज – उनसे मिली नजर।
खाटू गया मैं पहली बार,
मन को लुभाया ये दरबार,
हुक सी दिल में उठने लगी,
श्याम से हो गया मुझको प्यार,
झुक कर किया नमन,
जब से मिली शरण,
श्याम ने सर पर हाथ धरा,
बोझ मेरे सिर का उतरा,
किरपा श्याम ने बरसाई,
बाग हो गया हरा भरा,
महका मेरा चमन,
अब जीवन में मस्ती हैं,
मेरी सुखी गृहस्थी है,
जो आनंद में लेती हूँ,
दुनिया उसे तरसती है,
रहती हूँ मैं मगन,
श्याम के दर पे जाता हूँ,
कुछ लेकर ही आता हूँ,
‘बिन्नू’ कहता इसीलिए,
श्याम तराने गाता हूँ,
करता हूँ मैं भजन,
स्वर – गिन्नी कौर।
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