
जय,,, जय जय माँ, जय,,, जय जय माँ
जय काली,,, कलकत्ते वाली,,,
तूँ ही माँ दुर्गा,,, तूँ महाँकाली
( जय काली, जय काली, जय काली माँ
तूँ ही दुर्गा,,, तूँ ही अम्बे
तूँ ही झंडेवाली माँ,,,
काल कालिका, रूप तुम्हारा, मुंडन की गले माला है
माँ मुसकाए, नागिन जैसी, बरसे नैनो से ज्वाला है
चंचल चप्पला, सी चम चम चम
,चमके भुजा में भुजाली माँ,
रण में बनकर, रण चंडी माँ, दुष्टों को ललकार रही
लाल लहू से, लसी हुई, लट लट काली फटकार रही
लप लप चिप्या, लपकाए माँ
, पिए लहू की प्याली माँ,
शुम्भ निशुम्भ को, मारा तूने, हाथ करोड़ों फैला के
माँ काली के, क्रोध से सारे, राक्षस भागे थर्रा के
महिषासुर को, मारने वाली
, तूँ अम्बे बलशाली माँ,
जब जब आई, क्रोध में माँ तूँ, शिव ने भार सँभाला है
लेट गए, चरणों में शँकर, देख के रूप विशाला है
*जिहभा निकल, आई मईया की
, शांत हुई तूँ काली माँ,
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