
जय गौरी नंदन,
हाथ जोड़ हम,
वंदन कर करते है।।
जो प्रथम गणेश मनाव:,
वो मनवांछित फल पाव:,
जो शरण इनहीं के आवं,
उन्हीं के संकट करते है,
वंदन करते है।।
मस्तक पर तिलक विराजे,
गल मोतियन माला साजे,
हे सच्चे दीनानाथ,
हम शरण तेरी पड़ते है,
प्रभु हम पर कृपा किजो,
हमें ज्ञान ध्यान वर दीजो,
हमें अपनी शरण में लिजो,
धन्य पार्वती है माई,
जिने जायो गणपात राही,
तीन लोक के नाथ,
शरण हम तेरी पड़ते है,
गायक – टोनी बलहारा।
प्रेषक – राकेश कुमार जी।
खरक जाटान(रोहतक)
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