
जहाँ डाल डाल पर सोने की चिड़ियाँ देशभक्ति गीत
जहाँ डाल डाल पर,
सोने की चिड़ियाँ करती है बसेरा।
श्लोक – गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु,
गुरुदेव महेश्वरा,
गुरु साक्षात परब्रह्म,
तत्समये श्री गुरुवे नम:।
वो भारत देश है मेरा,
जहाँ सत्य अहिंसा और धर्म का,
पग-पग लगता डेरा,
ये धरती वो जहाँ ॠषि मुनि,
जपते प्रभु नाम की माला,
जहाँ हर बालक एक मोहन है,
और राधा एक एक बाला
जहाँ सूरज सबसे पहले आकर,
डाले अपना फेरा,
जहाँ गंगा जमुना कृष्णा और,
काँवेरी बहती जाये,
जहाँ उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम,
को अमृत पिलवाये,
कहीं ये फल और फूल उगाए,
केसर कहीं बिखेरा,
अलबेलों की इस धरती के,
त्यौहार भी है अलबेले,
कहीं दीवाली की जगमग है,
होली के कही मेले,
जहाँ राग रंग और हँसी खुशी का,
चारों ओर है घेरा,
जहाँ आसमान से बातें करते,
मंदिर और शिवाले,
किसी नगर में किसी द्वार पर,
कोई न ताला डाले,
और प्रेम की बंसी जहाँ बजाता,
आए शाम सवेरा,
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