
जालोरी रा पीर केवाया ओ,
नाथजी जालोंरी रा पीर केवाया ओ,
शांतिनाथ जी अमर पद पाया ओ,
राज म्हारा पीरजी,
भगतो रे मन भाया ओ राज।।
गाँव भागली मे जन्म धरायो रे,
रावत सिंह जी एतो पिताजी केवाया रे,
माता सिन्गारी केवाया ओ,
पीरजी सखीया वो मंगला गाया ओ,
म्हारा पीरजी ए सत्यलोक सु,
आया ओ राज शांतिनाथ जी,
पिताजी तो लेने आया,
गुरूजी रे चरना मे,
केसर नाथजी आगे,
अर्पण कर दीना रे.
ए गुरू काना मे तो कुण्डल पहराया ओ,
गुरूजी भगवा तो भेट पहराया ओ,
तन मन धन सु गुरूजी,
सेवा मे रहता ओ,
केसर नाथजी तो,
अमर पद पायो ओ,
पीठाधीश आपने बनायो ओ,
नाथजी भगत घनेरा हर्षाया ओ,
गोरक्ष नाथजी अटे,
धूनो रे धुकायो रे,
राजा मान भले,
भगती कमायो रे,
नाथ संप्रदाय आपनाया रे एतो,
नाथ संप्रदाय आपनाया रे,
मारवाड़ जालोर माई,
राज थे करायो रे,
बत्तीस चौमासा कर,
जगत जगायो रे,
पग पग परचा दिराया रे नाथजी,
भोला भगता पर महर करायो रे,
आप नाथजी म्हारा,
शिव मे समाया रे,
अलख समाधियाँ मे,
आसन धरायो रे,
जोरावर भजन बनायो रे पीरजी,
‘श्याम पालीवाल’ गुण गायो रे,
गायक – श्याम पालीवाल जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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