
जिंदगी में मुझे कुछ मिले ना मिले,
हर घड़ी आपकी बस कृपा चाहिए,
नाम की तेरी शोहरत कमा पाऊं मैं,
तेरी इतनी सी मुझको कृपा चाहिए,
तर्ज – आज कल याद कुछ और।
तेरी किरपा का मुझको तकाज़ा हुआ,
ये तजुर्बा मुझे ताज़ा ताज़ा हुआ,
आपकी ये कृपा यूँ ही मिलती रहे,
उम्र भर अब यही सिलसिला चाहिए,
मैंने तुमसे ना की नाम की आरजू,
बस बनाए तू रखना मेरी आबरू,
आस निर्धन की इसके सिवा कुछ नहीं,
आपसे ये इनायत सदा चाहिए,
मेरा हर एक कदम तेरी राहों में हो,
मेरा अंतिम सफर तेरी बाहों में हो,
तुम रहो श्याम बनकर मेरे रहगुजर,
और कुछ ना तुम्हारे सिवा चाहिए,
मेरी ज्यादा बड़ी कोई ख्वाहिश नहीं,
आप से मेरी बाबा गुजारिश यही,
मैंने ‘माधव’ हिये की सुना दी प्रभु,
आप से आपकी बस रजा चाहिए,
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