
उनके जीने का ढंग निराला,
जिनके संग में सदा खाटू वाला,
जय श्री श्याम बोलो जय श्री श्याम,
भूल के अपनी हस्ती को,
लेते है श्याम की मस्ती जो,
जग की माया भूल सदा,
देखे कृपा बरसती वो,
करते जो चिंतन बाबा का,
उनकी चिंता का निकले दिवाला,
जब श्याम के प्रेमी मिलते है,
भक्ति के पुष्प ही खिलते है,
श्याम कृपा की चर्चा से,
भक्तो के संकट टलते है,
जो श्याम के प्रेमी बन जाते,
उनका रहता सदा बोलबाला,
आ छोड़ दे अपने स्वारथ को,
तू अपना ले परमारथ को,
तुझे सांवरिया अपना लेगा,
तू तज दे विषय पदारथ को,
हारे का साथी सांवरिया,
कहता ‘रोमी’ वो किस्मत वाला,
स्वर / रचना – सरदार रोमी जी।
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