
जिनको जिनको सेठ बनाया,
वो क्या रिश्तेदार है,
उनसे तो प्यार है,
हमसे तकरार है।।
वो भी बाबा कहते है,
हम भी बाबा कहते है,
वो भी सेवा करते है,
हम भी सेवा करते है,
हम तो छोटे मोटे भिखारी,
वो क्या जागीरदार है,
वो भी परिवार तेरा,
ये भी है परिवार तेरा,
उनको भी आधार तेरा,
हमको भी आधार तेरा,
हम तो तुम्हारे दर के नौकर,
वो क्या हिस्सेदार है,
वो भी दर पर जाते है,
हम भी दर पर जाते है,
वो भी मांग लाते है,
हम भी मांग के लाते है,
देख देख कर झोली भरता,
तू कैसा दातार है,
उनको भर भंडार दिया,
उनको छप्पर फाड़ दिया,
जब आई मेरी बारी,
अपना पल्ला झाड़ दिया,
उनको भक्तों का तेरा साथ में,
चलता क्या व्यापार है,
वो भी लाल तुम्हारे है,
हम भी लाल तुम्हारे है,
तेरे पास क्या श्याम धनी,
दिल भी न्यारे न्यारे है,
वही अकेले वारिस हम क्या,
झूठे दावेदार है,
किस्मत फर्क समझती है,
तू भी फर्क समझता क्या,
किस्मत से गर मिलता है,
फिर तू झोली भरता क्या,
श्याम धनी तकदीर बदलता,
ये कहना बेकार है,
मर्ज़ी है मेरे श्याम की,
होना है सो होना है,
भेद तुम्हारे दिल में है,
इसी बात का रोना है,
अलग अलग नज़रों से देखे,
तू कैसी सरकार है,
जिनको सेठ बनाया है,
हल्ला यहीं मचाते है,
खाटू जाकर लाये है,
नीचा हमें दिखाते है,
‘बनवारी’ बस इतना बता दे,
खाटू क्या दो चार है,
स्वर – जय शंकर जी चौधरी।
प्रेषक – हरिओम गलहोत्रा
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