
जिसकी ऊँगली पे चलता ये संसार है,
वो खाटू वाला श्याम धनि मेरा यार है,
खाटू में लगा कर बैठा जो दरबार है,
मेरा यार है वो मेरा यार है,
जिसकी उंगली पे चलता ये संसार है,
तर्ज – कबतक चुप बैठे अब तो।
कोई हमसे पूछ के देखो,
कैसे ये नाम है करता,
भगतो से पूछ कर देखो,
कैसे ये काम है करता,
इनके भगतो के आगे,
सब लाचार है,
जीते की दुनिया सारी,
हारे के ये है सहारे,
गिरते को आप उठाते,
ऐसे है श्याम हमारे,
जो कहलाते दुनिया में,
लख दातार है,
दुनिया में देव हज़ारो,
पर ये है मेरे अपने,
खाटू जाके ही सबके,
सच्चे होते सारे सपने,
बस इनके भरोसे,
‘मित्तल’ का परिवार है,
स्वर – कन्हैया मित्तल।
प्रेषक – वासुदेव शर्मा
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