
जी भर नचा ले हमको,
तेरे दरबार में,
दुनिया के आगे नाचूं,
वो दिन ना आये।।
तर्ज – सौ साल पहले।
हम तेरे हो जाएँ,
यही एहसान काफी है,
फिर जीवन में मेरे,
ना कुछ अरमान बाकी है,
किसी और की फिर हमको,
नहीं दरकार है,
ये दुनिया वाले तो,
लाज के पीछे रहते हैं,
थोड़ी सी मदद करके,
ज़माने भर में कहते हैं,
दूर ही रखना हमको,
ऐसे संसार से,
मेरी धड़कन तुम ही हो,
मेरा तो जीवन तुम ही हो,
बस इतना समझ लो श्याम,
मेरा तो सब कुछ तुम ही हो,
चौखट पे तेरी बाबा,
मेरा परिवार है,
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