
जो तने ब्याहण आया पार्वती
उसका रूप निराला से
माथे चंदा जटा में गंगा
गळ में नाग एक काला से
ओ माथे चंदा जटा में गंगा
गळ में नाग एक काळा से
ओ इसा के देख्या पार्वती
जो इसके प्रेम में बहगी तू
रंगमहलां के ठाठ छोड़
इब जंगल के मा रहगी तू
ओ रंगमहलां के ठाठ छोड़
तने गेर के केशर दूध पिया
यो भांग के पीवन आळा से
तेरी सखी सहेली मारे बोली
अजब तेरी ये कहाणी से
मोडे का ना कोई ठिकाणा
महलां की तू राणी से
ओ मोडे का ना कोई ठिकाणा
ओ भूता गेल्या इसकी यारी
गळ हाडां की माळा से
ओ भोलेनाथ मने कर दे माफ
मेरी सखी सहेली जाणी ना
विष को पीके बचा के श्रष्टि
जूठी कोई कहाणी ना
ओ विष को पीके बचा के श्रष्टि
ओ देवों के महादेव तेरा है
भगत यो झिंझरिया आळा से
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