
जोगन बानी रे मैं तो सँवारे की ,
साँची लगन मन बाँवरे की,
गिरधर मेरे मन में समाये,
और न कुछ भी मोहे भाये
मन में प्रीत जगी सँवारे की,
इक रत्न मन वनवारे की,
मैं तो उनकी प्रेम दीवानी,
हम दोनों की प्रीत पुरानी,
लागि लगन श्याम सँवारे की,
नैनं में छवि श्याम की प्यारी,
सास नन्द मोहे देते है गाली,
चुनरी रंगी रे रंग सँवारे की,
श्याम सलोना मुखड़ा भोला,
मधुर मधुर सब मन डोला,
बंसी भजि रे श्याम सँवारे की,
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