
झूला झूले जनक दुलारी झूला रहे अवध बिहारी
Saavan Ki Ghata Ghanaghor Ki Rimajhim Barase Chaaron Or lyrics
सावन की घटा घनघोर की रिमझिम बरसे चारों ओर,
झूला झूले जनक दुलारी झूला रहे अवध बिहारी.....
श्यामल श्यामल राम हमारे,
गौर वरन है सिया हमारी,
जैसे चंदा और चकोर की रिमझिम,
राम का भीगे पीला पीताम्बर,
सीता की भीगे रेशम साड़ी,
सखी मन में उठे हिलोर की रिमझिम,
दादूर मोर पपीहा बोले,
पीहू पीहू की बोली बोले,
सब मिलके मचावे शोर की रिमझिम,
सावन का आया मस्त महीना,
हरियाली से भरा हर कोना,
सबके गावे मिलके मल्हार की रिमझिम,
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