
डेरू पे नाचूंगी आवै जोतराम की पेशी
डेरू पे नाचूंगी,
हे डेरू पै नाचूंगी,
आवै जोतराम की पेशी,
मेरी डटती कोन्या काया हो,
बाबा का रूप समाया हो,
मेरै भगती का रंग छाया हो,
छाई रोम रोम में मस्ती,
भारि जोतराम की हस्ती,
कोन्या भुली जावै भगती,
हे काया की थी मैं रोगण,
बणगी जोतराम की जोगण,
चाहे दुनियां लागो टोकण,
होरया संजय सिंहमार भी रंग में,
मनोज बेलरखा संग में,
होरया भगती आले ढंग में,
गायक – मास्टर श्री मनोज बेलरखा जी।
लेखक – मास्टर श्री संजय सिंहमार जी।
प्रेषक – संंजीव टोहाना। 9896578391
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