
तुझे ढूँढू कहाँ मेरे सांवरिया,
मुझे पते ठिकाने दे,
राहों में तेरी बैठी नैना बिछाए,
रज चरण तो पाने दे,
तुझे ढूंढूं कहाँ।।
तर्ज – बेटियां क्यों पराई है।
मैंने गलियों में था कितना ढूंढा,
मुझे कहीं नज़र ना आए,
सारी लता पताएं देखीं,
ना दरस तुम्हारे पाए,
ढूंढूे कदम्ब तले,
क्यूँ निष्ठुर बने,
दिल की तपस बुझाने दे,
काली बदली में था तुमको ढूंढा,
सोचा वहीं छिपे तुम होंगे,
बरसी बदली तो बूंदों में ढूंढा,
शायद वहीं दीपे तुम होंगे,
बूँदो की लड़ी,
सारी खाली पड़ी,
भीनी खुशबु तो आने दे,
नदियों तालों में था तुमको ढूंढा,
उनकी लहरों में बैठे होंगे,
बंसीवट कालीदेह पे तलाशा,
मेरे ब्रजेश कैसे होंगे,
माखन मिशरी बादाम,
ढूंढे काजू गोदाम,
अपनी झलक तो आने दे,
छोड़ा राज पाठ तेरे खातिर,
और पति तुम्हे स्वीकारा,
कहे ‘बदनसिंह’ मीरा तो,
रटती है नाम तुम्हारा,
गाए ‘प्रियंका’,
दूर करो शंका,
झाँकी दिल में बिठाने दे,
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