
तुम अगर श्याम गुन को गाओगे ।
हाँ तुम अगर श्याम गुन को गाओगे ।।
जब कभी भी उदास होगे तुम ।
श्याम को धड़कनों में पाओगे ।।
बेसहारों का सहारा बनते,
प्रेमी-भक्तों के दुःख को हरते ।
दूर विपदा सभी हो जायेगी,
जब शरण में प्रभु के जाओगे ।।
तुम...
जिनको अपना ही मानते हो तुम,
है बहुत प्रेम जानते हो तुम ।
सबसे पहले वही रुलायेंगे,
तब ये झूठे हैं जान पाओगे ।।
झूठे लोगों से आश ना करना,
अपने जीवन का नाश ना करना ।
कोई अपना न कान्त श्याम बिना,
जपोगे श्याम पार जाओगे ।।
भजन रचना : दासानुदास श्रीकान्त दास
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