
तुम बसी हो कण कण अन्दर माँ
हम ढूंढते रह गये मंदिर में
हम मूढमति हम अनजाने
माँ सार तुम्हारा क्या जाने
तेरी माया को न जान सके
तुझको न कभी पहचान सके
हम मोह की निद्रा सोये रहे
माँ इधर उधर ही खोये रहे
तू सूरज तू ही चन्द्रमा
हर जगह तुम्हारे डेरे माँ
कोई खेल न जाने तेरे माँ
इन नैनो को न पता लगे
किस रूप में तेरी ज्योत जगे
तू पर्वत, तू ही समंदर माँ
कोई कहता तुम ही पवन में हो
और तुम ही ज्वाला अगन में हो
कहते है अम्बर और जमी
तुम सब कुछ हो, हम कुछ भी नहीं
फल फूल तुम्ही, हो तरुवर माँ
हम ढूंढते रहगये मंदिर में
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