
तू मोटी जगदम्बा मारी,
तू मोटी जगदम्बा माँ,
ओ जग छलीया अनक जग छलीया,
है झगड़ा से न्यारी माँ,
अरे सतयुग में माँ अमिया केवाई,
शिव शंकर घर नारी ओ,
देव दानव ने दोई लडाया,
अरे त्रेतायुग मे सीता केवाई,
रामचंद्र घर नारी माँ,
राम रावण ने दोई लडाया,
अरे द्वापरयुग में बनी द्रोपदा,
पांडवों घर नारी माँ,
कैरव पांडव ने दोई लडाया,
अरे कलयुग मे मां बनी कालका,
कालंका घर नारी माँ,
अरे शंकर टांक जगदम्बा रे शरने,
माताजी महीमा गाई माँ,
गायक – शंकर टांक।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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