
मैं लाल चुनरिया लायी
जो तूने ना माँ को ओढ़ाई
तेरी मेरी कट्टी हो जाएगी।।
मत चुनरी चढ़ा मेरी बहना
जो तूने ना माना मेरा कहना
मैं चुनरी ओढ़ने क्यो जाऊँ
मुझे समय नहीं है बतलाऊँ
माँ को चुनरी प्यारी है
ये जाने दुनिया साड़ी
मेरे दूजे काम जरुरी
जो तू ना समझे मजबूरी
मां के नवरात आए हैं
ये भक्ति के दिन बताये हैं
तू आप चली जा मंदिर में
बड़ी श्रद्धा है तेरे अंदर में ।।
तुझे बात बता दू सारी
जो बना ना मां का पुजारी
तू कंजक बन के पूजा है
तुझे और नहीं काम दूजा
पूजा से ही पूरी मन्नत है
माँ के चरणो में जन्नत
तेरी बात में है सचाई
बा ने बिगड़ी नहीं बनायी
जो मां की भक्ति कर जाएगी
भव सागर से तार जाएगा
किस्मत का ताला खुले जहां
तेरे मन का कमल खिलेगा
जो मांझी तुझे मिलेगा
वहा इच्छा पूरन हो जाएगी।।
चल चुनरी चड़ा बहन
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