
तेरे चरण कमल में श्याम लिपट जाऊं रज बनके
तेरे चरण कमल में श्याम,
लिपट जाऊं रज बनके,
नित नित तेरा दर्शन पाऊं,
हरसि हरसि के हरि गुण गाऊं,
मेरे नस नस बस जाओ श्याम,
छिन छिन तेरा सुमिरन होवे,
सब कुछ तुझपे अर्पण होवे,
सब दिन आठों याम,
श्याम सुन्दर से लगन है लागी,
प्रीति पुरानी मन में जागी,
अब आ गया तेरे धाम,
स्वर – आचार्य नवल किशोर जी महाराज।
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